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संत कबीरदास जयंती स्टेटस | Sant Kabir Das Jayanti Status In Hindi

Sunday, June 2, 2019
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Kabirdas Jayanti 2019 | Hindi Status And Wishes

Kabirdas Jayanti 2019 | कबीर दास के दोहे हिंदी अर्थ सहित

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय ।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय ।।
अर्थ:- बड़ी बड़ी किताबे पढ़कर संसार में कितने ही लोग  मृत्यु के द्वार पहुंच गए, पर सभी विद्वान न हो सके। कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले। अर्थात प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा।
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साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।

Happy Kabirdas Jayanti | HD Images Of Kabor jayanti

Happy Kabirdas Jayanti | HD Images Of Kabor jayanti

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय
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पंडित और मसालची, दोनों सूझे नाहिं।
औरन को कर चांदना, आप अंधेरे माहिं।।
पंडित और मशाल वाले दोनों को ही परमात्मा विषयक वास्तविक ज्ञान नहीं है। दूसरों को उपदेश देते फिरते हैं और स्वयं अज्ञान के अंधकार में डूबे हुए हैं।
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अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।
अर्थ: न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है। जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है।

Motivational Dohe In Hindi With Images | Status,Dohe In Hindi

Motivational Dohe In Hindi With Images | Status,Dohe In Hindi

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर!
ना काहू से दोस्‍ती, न काहू से बैर!!
अर्थ:- इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं,
कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्‍ती नहीं तो दुश्‍मनी भी न हो!
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बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।
अर्थ: जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न मिला। जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है।

Kabir Das Status In Hindi With Images | HD Wallpaper On Kabir Jayanti

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दोस पराए देखि करि, चला हसन्‍त हसन्‍त,
अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत!!
अर्थ:- यह मनुष्‍य का स्‍वभाव है कि जब वहदूसरों के दोष देखकर हंसता है, तब उसे अपने दोष याद नहीं आते जिनका न आदि है न अंत!
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तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय,
कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।
अर्थ: कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा न करो जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता है। यदि कभी वह तिनका उड़कर आँख में आ गिरे तो कितनी गहरी पीड़ा होती है !

Kabir jayanti Hindi HD Images | Kabir Jayanti Ki Shubhkamna Images

Kabir jayanti Hindi HD Images | Kabir Jayanti Ki Shubhkamna Images

साधू भूखा भाव का, धन का भूख नाहिं।
धन का भूखा जो फिरै, सो तो साधु नाहिं।।
अर्थ:- साधु प्रेम-भाव का भूखा होता है, वह धन का भूखा नहीं होता। जो धन का भूखा होकर लालच में फिरता रहता है, वह सच्चा साधु नहीं होता।
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निरबैरी निहकांमता, साईं सेती नेह।
विषिया सूं न्यारा रहै, संतनि का अंग एह।।
अर्थ:- वैररहित होना, निष्काम भाव से ईश्वर से प्रेम और विषयों से विरक्ति- यही संतों के लक्षण हैं। 

और देखे : Kabir Das Full Details In English

Sant Kabir Hd Images | Kabirdas Ji ke Dohe In Hindi 

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तन मन ताको दीजिए, जाके विषया नाहिं।
आपा सबहीं डारिकै, राखै साहेब माहिं।।
अर्थ:- कबीर साहब कहते हैं कि अपना तन-मन उस गुरु को सौंपना चाहिए जिसमें विषय-वासनाओं के प्रति आकर्षण न हो और जो शिष्य के अहंकार को दूर करके ईश्वर की ओर लगा दे।  
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झिरमिर- झिरमिर बरसिया, पाहन ऊपर मेंह।
माटी गलि सैजल भई, पांहन बोही तेह॥
अर्थ: बादल पत्थर के ऊपर झिरमिर करके बरसने लगे. इससे मिट्टी तो भीग कर सजल हो गई किन्तु पत्थर वैसा का वैसा बना रहा.

Kabir Das Teachings In Hindi | Mahant Kabir Amrit Wani In Hindi

Kabir Das Teachings In Hindi | Mahant Kabir Amrit Wani In Hindi

रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय ।
हीरा जन्म अमोल सा, कोड़ी बदले जाय ॥
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जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।
अर्थ: जो प्रयत्न करते हैं, वे कुछ न कुछ वैसे ही पा ही लेते  हैं जैसे कोई मेहनत करने वाला गोताखोर गहरे पानी में जाता है और कुछ ले कर आता है। लेकिन कुछ बेचारे लोग ऐसे भी होते हैं जो डूबने के भय से किनारे पर ही बैठे रह जाते हैं और कुछ नहीं पाते।

Kabir Das Suvichar In Hindi | Hindi HD Images Of Kabir Das

Kabir Das Suvichar In Hindi | Hindi HD Images Of Kabir Das

बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।
पंछी को छाया नहीं फल लागे अति दूर ॥
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बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।
अर्थ: यदि कोई सही तरीके से बोलना जानता है तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रत्न है। इसलिए वह ह्रदय के तराजू में तोलकर ही उसे मुंह से बाहर आने देता है|

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 संत कबीर दास जयंती विशेष इन हिंदी | Kabirdas Jayanti Wishes In Hindi

 संत कबीर दास जयंती विशेष इन हिंदी | Kabirdas Jayanti Wishes In Hindi

फूटी आंखि विवेक की, लखै न संत असंत।
जाके संग दस बीस हैं, ताका नाम महंत।
अर्थ:- जब विवेकयुक्त दृष्टि नहीं रह जाती है तो व्यक्ति साधु और ढोंगी में अंतर नहीं कर पाता। जो दस-बीस शिष्यों को अपने साथ लगा लेता है, वही महंत कहलाने लगता है।
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कहत सुनत सब दिन गए, उरझी न सुरझ्या मन।
कहि कबीर चेत्या नहीं, अजहूँ सो पहला दिन॥
अर्थ: कहते सुनते सब दिन बीत गए, पर यह मन उलझ कर न सुलझ पाया ! कबीर कहते हैं कि यह मन अभी भी होश में नहीं आता. आज भी इसकी अवस्था पहले दिन के ही समान है.

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