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लालची दोस्त भीमा | Lalchi Dost | Hindi Kahaniya For Kids | Hindi Moral Stories

Thursday, June 6, 2019
एक गाव मै हरी नाम का एक व्यापारी रहता था उसका व्यापार कुछ दिनों से अच्छा नहीं चल रहा था,उस पर बहुत सारा कर्ज भी था जिससे वह बहुत परेशान रहता था! एक दिन हरी ने धन कमाने के लिए परदेश जाने का विचार किया! हरी ने अपना गांव छोड़ने से पहले अपनी सारी जमीन जायदाद बेचकर अपना कर्ज उतार दिया!
अब हरी के पास केवल एक लोहे का तराजू बाकी था उसने सोचा "तराजू जो व्यापार का आधार है  इसे बेचना ठीक नहीं! ऐसा करता हूं, इसे अपने दोस्त भीमा के पास रख देता हूं!"
Lalchi Dost | Hindi Kahaniya For Kids

हरी भीमा के घर पहुंचा और भीमा से कहां- "मित्र, बीमा में व्यापार करने परदेश जा रहा हूं तो सोचा यह तराजू तुम्हारे पास रख दु! परदेश से वापस आते समय मैं तुमसे यह ले लूंगा!"
भीमा- "कोई बात नहीं मित्र जैसा देकर जा रहे हो ठीक वैसा ही मिलेगा!"
अब हरि दूर परदेस जाने के लिए निकल गया! वहा उसने बहुत मेहनत की और कुछ ही दिनों में उसने बहुत सारा धन जमा कर लिया! और हरी ने सोचाकि  अब उसने बहुत सारा धन जमा कर लिया है उसे अपने गाव लोट जाना
चाहिए! ऐसा सोचकर वह वापस जाने को तैयार हो गया! गांव पंहुचते ही वह भीमा के घर गया! हरि को देख कर भीमा थोडा घबराया पर उसने चालाकी से हरि का हाल पूछा- "मित्र, हरी तुम्हारी प्रदेश यात्रा कैसी रही!"

Lalchi Dost | Hindi Kahaniya For Kids | Hindi Moral Stories

हरी - "मैंने परदेश में अच्छा व्यापार किया और मैंने बहुत सारा धन जमा भी कर लिया! अब मैं तुमसे वह तराजू वापस लेने आया हूं!"
भीमा यह सुनकर थोड़ा घबराया! और घबराते हुए बुला- "वो..वो.. वो तराजू तो चूहे कहा गए! हा वह तराजू तो चूहे कहा गए!मैंने सोचा था तहखाने में तराजू सुरक्षित रहेगा पर वहां तो उसे चूहे खा गए!" हरि समझ चुका था की भीमा के मन में बेईमानी आ गई है पर अब उपाय कुछ नहीं था!  कुछ देर सोचने के बाद हरी ने कहा- चलो मित्र मै एक बार नदी में स्नान करने जा रहा हु वेसे में अकेलाजा रहा हूं तो क्या तुम अपने लड़के को मेरे साथ भेज सकते हो! वापस आते समय ने उसे तुम्हारे घर छोड़ दूंगा!

लालची दोस्त भीमा | Lalchi Dost

भीमा ने सोचा- चलो मामला आसानी से टल गया! और उसने अपने बेटे को हरि के साथ भेज दिया!
थोड़ी दूर जाने के बाद हरी ने लड़के से कहा- "बेटा तुम थोड़ी देर यही  रुको कहीं जाना मत!" और हरी वापस भीमा के घर जा पहुंचा! हरि को अकेला आता देख पूछा- "मेरा लड़का, मेरा बेटा कहां है वह तो  तुम्हारे साथ गया था न.."


हरि ने कहा-"वो.. वो.. उसे तो चिल उठाकर ले गई!"
भीमा ने कहा- "यह क्या बोल रहे हो कभी चिल बच्चे को उठाकर भाग सकती है?"
हरि ने कहा- "अरे भाई, जब एक चिल बच्चे को नहीं उठा सकती, तो लोहे का तराजू चूहे कैसे खा सकते हैं!" यह सुनते ही भीमा को अपनी गलती का अहसास हुआ तथा उसमें मान लिया कि उसने अपने मित्र के साथ धोखा किया! उसने माफी मांगी और अब हरि ने उसका बेटा लौटा दिया और भीमा ने उसका लोहे का तराजू भी |


तो बच्चों इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है की  जैसी करनी वैसी भरनी!

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✿ Story - Lalchi Dost Bhima Hindi Kahani ✿ Animator - Tabby TV Animation Team © Tabby TV 2019

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